पीएम नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा

updated on August 26th, 2017 at 12:00 pm

पीएम नरेन्द्र मोदी इस वक्त इजराइल के किंग डेविड होटल में बेंजामिन नेतन्याहू के साथ आतंकवाद समेत बहुत से मुद्दों पर बातचीत की और पीएम नरेंद्र मोदी जी कई बड़े नेताओं के साथ बैठक में शामिल भी हुए। नरेन्द्र मोदी जिस किंग डेविड होटल में ठहरे हुए थे वो इजरायल का वही ऐतिहासिक होटल है जहाँ पर फलिस्तीन पर कब्जा करने की रणनीति बनाई गयी थी। पीएम नरेन्द्र मोदी का ये दौरा इस लिए भी अहम है क्यूंकि वो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री है, जिन्होंने इजरायल का दौरा किया, पीएम नरेंद्र मोदी से पहले ऐसा कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ जिन्होंने इजराइल का दौरा किया हो। नरेंद्र मोदी के इस इजराइयली दौरे से दुनिया भर में गहरे असरात पड़ने वाले है ख़ास कर चीन और अरब देशों को भारत की ये नजदीकी अखर सकती है, क्यूंकि नरेंद्र मोदी जिस जमीन पर खड़े हुए थे वो कभी मुसलमानों के कब्जे में हुआ करती थी और दूसरी बात ये है की इजराइयल चीन का विरोधी है, इस कारण भारत और इजराइयल की नजदीकी से चीन सदमे में आ गया गया है।

आपको बता दें की 19वी सदी इसवी का इजराइल फिलिस्तीन का हिस्सा था, उसकी कुल आबादी में मुस्लिम आबादी का हिस्सा 80 प्रतिशत था जोकि इजराइल के यहूदी राष्ट्र की स्थापना के साथ निरंतर घटता चला गया। पूरी दुनिया के यहूदियों ने मुस्लिम देशों के बीच में एक यहूदी रियासत का ख्वाब लेकर जमा हुए और फिर फलिस्तीन के कुछ हिस्से पर कब्जा कर वहा पर इजराइल राष्ट्र का निर्माण कर दिया।

भारत ने सैद्धान्तिक तौर पर कभी इजराइल का साथ नही दिया क्यूंकि इजराइल ने गलत नीतियों का सहारा लेकर एक राष्ट्र की संप्रभुता पर कब्जा किया था जोकि गलत था, लेकिन अब पीएम नरेन्द्र मोदी उसी देश से हाथ मिला लिया है, इन सब बातो से जाहिर है की अब भारत पे गलत नजर डालने वाला पाकिस्तान और चीन दोनों को गहरा सदमा लग गया है।

भारत तेल और दूसरी जरूरतों के लिए इरान और सऊदी अरब पर आश्रित है, अगर अरब देशों से भारत के रिश्तों में कुछ खटास पैदा होती है, तो इसका परिणाम घातक हो सकता है, क्यूंकि मुस्लिम राष्ट्रों के लिए फलिस्तीन के साथ वहां पर मौजूद मस्जिद अल अक्सा की बड़ी अहमियत है जिस पर इजराईल के यहूदी भी अपना अधिकार जमाने और कब्जा करने की कोशिशें करते आये हैं।

आपको बता दे की भारत और इजराइयल के बीच 25 वर्ष पहले राजनयिक संबंधों की स्थापना हुई थी । सैन्य मामलों, कृषि, विज्ञान व तकनीक, जल प्रबंधन और शिक्षा जैसे अन्य मामलो में भारत और इजराइयल एक दूसरे का सहयोग करते आए हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पीएम नरेन्द्र मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों में मजबूती लाएगी और साथ ही में देश के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लाएगी।

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