ब्लू व्हेल गेम

कुछ दिनों पहले ब्लू व्हेल गेम खेल कर खुदकुशी करने वालों के मामले काफी बढ़ गए थे। भारत में भी एक स्टूडेंट के सुसाइड करने के बाद इस गेम को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था और खबर यह भी आई थी की ब्लू व्हेल गेम बनाने वाले सिरफिरे युवक को जेल भेज दिया गया है। लेकिन इसके बाद भी तमिलनाडु के एक छात्र ने ब्लू व्हेल गेम खेल कर खुदकुशी कर ली है जो बेहद ही चौंकाने वाला है। क्योंकि सुसाइड करने वाले 19 साल के छात्र ने अपने हाथ पर ब्लू व्हेल लिखकर चित्र बनाया है। अब सोचने वाली बात यह है कि जब ब्लू व्हेल गेम को बंद कर दिया गया है तो फिर कैसे बच्चे इस गेम को खेल रहे हैं। यह बेहद ही चौंका देने वाला विषय है जानकारी के मुताबिक तमिलनाडु के मदुराई में रहने वाला 19 वर्षीय कॉलेज छात्र विग्नेश अपने घर में फांसी के फंदे पर झूल गया। सूचना मिलने पर परिजनों ने जब विग्नेश को देखा तो उसके बाएं हाथ में ब्लेड से ब्लू व्हेल लिखा गया था और साथ ही एक चित्र भी बना था।

जिसे देखकर उनके परिवार वालों के होश उड़ गए उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरु कर दी। पुलिस ने बताया कि विग्नेश के घर से एक नोट भी बरामद हुआ है जिसमें उसने लिखा है की ब्लू व्हेल यह गेम नहीं है बल्कि खतरा है जो एक बार इसको खेलना शुरु कर देता है तो इससे बाहर नहीं निकल पाता है। यह नोट देख कर पुलिस भी हैरान रह गई मृतक छात्र के दोस्तों ने भी बताया कि वह कई दिन से गुमसुम सा रहने लगा था।

वह ब्लू व्हेल गेम में उलझता जा रहा था दुनिया भर में ब्लू व्हेल गेम को बंद कर दिया गया है। उसके बावजूद भी यह गेम धड़ल्ले से खेला जा रहा है जो वाकई बेहद चिंता का विषय है। कुछ दिन पहले सरकार द्वारा इस जानलेवा गेम को बंद कराए जाने की खबर सुनकर दुनिया भर के लोगों ने राहत की सांस ली थी लेकिन फिर भी यह गेम खेलने के लिए उपलब्ध है यह कैसे हो सकता है यह लोगों के दिलों में भय पैदा कर रही है।

ब्लू व्हेल गेम को बैन करने के बाद अब ये गेम नये नामों से भी आने लगा है। दुनिया भर में अभी तक इस गेम को खेलने के बाद 300 लोगों ने सुसाइड कर लिया है जिसमें भारत भी शामिल है। इस गेम में खेलने वाले खिलाड़ी को 50 दिनों तक कई ऐसे कार्य करने को उकसाया जाता है। जिससे प्लेयर सुसाइड तक कर लेता है 50 दिनों तक चलने वाले इस गेम में कई तरह के टास्क दिए गए हैं।

जिसमें रेजर से हाथ में F57 लिखना सुबह 4:20 बजे उठकर डरावने वीडियो देखना, डिप्रेसिंग म्यूजिक सुनना, रेजर से हाथ में F40 लिखना, होंठ काटना, हाथ की नस काटना, सुई से छेद ना, हाथ में काटकर व्हेल का फोटो बनाना जैसे कई टास्क पुरे करने होते हैं। साथ ही छत के किनारों और पुल के किनारों ऊंची बिल्डिंग पर बैठने को उकसाया जाता है। और इस गेम के बारे में किसी को बताने से भी मना किया जाता है और आखिरी दिन प्लेयर को सुसाइड करने के लिए भेजा जाता है और साथ ही इसे खेलने वाले खिलाड़ी को धमकियां दी जाती है जिस से खिलाड़ी नेगेटिव फीलिंग्स और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।

ब्लू व्हेल गेम को बैन करने के बाद अब यह गेम नए नामों से आने लगा है। जिसका नाम है Wake me up AT 4:20 am. आपको बता दे की ब्लू व्हेल गेम कोई एप्प या सॉफ्टवेयर नहीं है जिसे आप मोबाइल में इनस्टॉल कर सकते हैं दर्शल ब्लू व्हेल चैलेंज आपको पर्सनल मैसेज के जरिए मिलता है। बताया जा रहा है कि इस दिन को इसके अलावा A silent house और A sea of whales नाम से भी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

भारत में कुछ बच्चों के ख़ुदकुशी करने के बाद दुनिया भर में 250 से ज़्यादा बच्चों को ख़ुदकुशी के लिए मजबूर करने वाले ब्लू व्हेल गेम पर फिर बहस छिड़ गई है। लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि अगर यह खेल बच्चों को आत्महत्या के लिए उकसा रहा है, तो इस पर पूरी दुनिया में प्रभावी रोक 2013 में पहला मामला सामने आने के बाद तुरंत क्यों नहीं लगाई गई? हालांकि 11 अगस्त को आईटी मंत्रालय ने गूगल, फेसबुक, व्हाट्सअप, इंस्टाग्राम, माइक्रोसॉफ़्ट और याहू जैसी कंपनियो को लिखित आदेश दिया था कि ब्लू व्हेल गेम के लिंक तुरंत हटाए जाएं। इसी मसले पर दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका पर सुनवाई चल रही है।

ब्लू व्हेल गेम

कोर्ट ने माना है कि 50 दिन का यह खेल आत्मघाती है, जिसमें खेल का एडमिनिस्ट्रेटर खेलने वालो को कठिन टास्क देता है। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि बच्चों के बाद अब युवा इस खेल के चक्कर में फंस रहे हैं। कोर्ट में अगली सुनवाई 22 अगस्त को होनी है। सवाल यह है कि ब्लू व्हेल गेम या इस तरह के दूसरे ऐसे खेल विकसित करने के पीछे कौन सी मानसिकता काम करती है? इंटरनेट पर कई ऐसे खेल आते रहते हैं। पता चलने पर सरकारें उन पर प्रतिबंध भी लगाती हैं, लेकिन तब तक बहुत से बच्चे उनके शिकार हो जाते हैं।

इस जानलेवा खेल की शुरुआत रूस से हुई। इसमें 50 कठिन टास्क बच्चों को मिलते हैं। रोज़ टास्क पूरा करने के बाद हाथ पर एक निशान बनाना पड़ता है और खेल पूरा होने के बाद ये निशान व्हेल का आकार ले लेते हैं। आख़िरी दिन प्लेयर को आत्महत्या करनी पड़ती है। खेल खेलने वाले बच्चों की तस्वीरें और दूसरी जानकारी भी नेट पर मांग ली जाती है। बच्चा अगर खेल शुरू करे, तो उसे बीच में छोड़ना बेहद मुश्किल होता है। 2013 में रूस में बच्चों की आत्महत्याएं बढ़ने पर ब्लू व्हेल गेम बनाने वाले फ़िलिप को गिरफ़्तार कर लिया गया था। उसे जेल की सज़ा हुई थी। फ़िलिप मनोरोगी था।

ब्लू व्हेल गेम

ब्लू व्हेल या इस जैसे दूसरे खेल समाजशास्त्रियों, मनोविज्ञानियों के लिए पेचीदा समस्याएं हैं। एकल परिवारों के दौर में बच्चे भयानक अकेलेपन के शिकार होते जा रहे हैं। पहले संयुक्त परिवार होते थे और माता-पिता पांच-छह बच्चे पैदा करते थे। लेकिन अब परिवार में एक या दो बच्चे ही होते हैं। माता-पिता, दोनों ही कामकाजी होते हैं। फ्लैट संस्कृति आ गई है। लिहाज़ा बच्चों के लिए घरों से निकलना बेहद मुश्किल हो गया है।

ऐसे में अकेलेपन के शिकार बच्चे आसानी से डिप्रेशन की चपेट में आ जाते हैं। ख़ुद को चोट पहुंचाने के टास्क करके वे ख़ुद को बहादुर समझने लगते हैं और ऊंची बिल्डिंगों से छलांग लगाकर जान दे देते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों पर नज़र रखें। अगर उनके हाथ-पैर पर चोट या किसी ख़ास क़िस्म का निशान देखें, तो गंभीरता से लें। उन्हें अकेले न रहने दें। असल में ब्लू व्हेल गेम जैसे खेल अकेलेपन से ही पैदा होते हैं।

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