बिग बॉस 11

बिग बॉस टीवी प्रोग्राम ब्रिटेन के चैनल 5 पर दिखाए गए बिग ब्रदर रीयलिटी शो की नकल है, जनवरी, 2014 में बिग ब्रदर के घर में ट्रुथ एंड डेयर के तहत एक पुरुष प्रतिभागी ने एक महिला प्रतिभागी की टीशर्ट में मुंह डालकर बच्चों की तरह दूध पीने का टास्क किया, तो ब्रिटेन जैसे देश में इसे अच्छा नहीं माना गया था, ग़नीमत है कि भारत में बिग बॉस के घर में अभी तक ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन कई बार ये वल्गैरिटी और घटिया हरक़तों को लेकर यह विवादों में रह चुका है

एक मनोरंजन चैनल पर सीज़न 11 में बिग बॉस के घर पहुंचाए गए लोग साज़िशों में लगे हैं, एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं इससे पहले 10 बार ये रीयलिटी शो प्रसारित हो चुका है, इतनी बार इसे नए कलेवर में टीवी स्क्रीन पर लाने से साफ़ है कि टीआरपी के मामले में हर बार यह अच्छा प्रदर्शन करता रहा है लेकिन क्या ऐसे रीयलिटी शो भारतीय संस्कारों के माफ़िक हैं? दूसरा बड़ा सवाल यह भी है कि अगर ऐसे प्रोग्राम भीरतीय संस्कृति के ख़िलाफ़ संदेश देते हैं, तो फिर लोग उन्हें देखकर टीआरपी क्यों बढ़ाते हैं?

भारत में मिल-जुलकर रहने का संयुक्त परिवारों का सिलसिला पुराना है, लेकिन अब आर्थिक कारणों से एकल परिवारों का दौर है, गांवों में अब भी संयुक्त परिवार मिल जाते हैं, वसुधैव कुटुंबकम् की संस्कृति वाले देश में आज एक ही घर में रहने वाले एक-दूसरे को नीचा दिखाने की साज़िशें रच रहे हैं और लोग इसे पसंद कर रहे हैं, तो यह दुर्भाग्य की बात है

इसके अलावा कम ही सीरियल हैं, जिनमें परिवारों में मेल-मिलाप के ज़रिए कहानी आगे बढ़ाई जा रही हो वरना तो सास-बहू और साज़िश वाले एंगल पर ही सारा पारिवारिक मनोरंजन टिका हुआ है, ऐसा नहीं है कि सकारात्मक संदेश देने वाले टीवी शो हिट नहीं होते, लेकिन निर्माता-निर्देशकों को साज़िशों के चक्रव्यूह रचने में ही मज़ा आ रहा है, यह प्रवृत्ति ख़त्म होनी चाहिए, क्या ख्याल है आपका, कमेंट बॉक्स में अपनी राय दें

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